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किसानों को ढूंढे नहीं मिल रहा है फास्फेटिक उर्वरक


अंबेडकर नगर
*किसानों को ढूंढे नहीं मिल रहा है फास्फेटिक उर्वरक*
अम्बेडकरनगर किसानों की नजदीकी स्तर पर उन्नतिशील उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित अधिकांश सरकारी समितियां अपनी उपयोगिता नहीं दर्शा पा रहीं हैं। औरंगनगर तो महज बानगी भर है शायद ही कोई समिति होगी प्रतिदिन निर्धारित समय में खुलती और बन्द होती होगी। उर्वरकों की बिक्री के लिए 91 सरकारी केन्द्रों के अलावां प्राइवेट दुकानों की संख्या सात सौ से भी अधिक है, जिसका भरपूर फायदा प्राईवेट दुकानदार उठा रहें है। मुंहमांगे दामों में उर्वरक की बिक्री कर किसानों का आर्थिक शोषण करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं।
सरकार की ओर से किसानों की आय दोगुना करने के लिए वैज्ञानिक खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा देने पर अपना ध्यान कुछ ज्यादा ही के्द्रिरत कर दिया है, वहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की नजरे इनायत किसानों पर नहीं हो रहीं हैं। नवीनतम तकीनीक से खेती करने की जानकारी किसानों के किस काम की है, जब उर्वरकों के लिए ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कागजी आंकड़ों में किसानों को जनदीकी स्तर पर संचालित समितियों से सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वैसे तो सरकारी केन्द्र एवं लाइसेंसी प्राइवेट दुकानों को मिलाकर आठ सौ से भी ज्यादा हैं। किसानों का आरोप है कि प्राईवेट दुकानदार की बात तो दूर सरकारी समिति पर अधिक मूल्य लिए जाने का विरोध करने पर सीधे इनकार कर दिया जाता है कि केन्द्र पर उर्वरक उपलब्ध भी नहीं है, जब कि निर्धारित मूल्य से अधिक यानि 50 से लेकर एक सौ रुपए लेकर दिया जा रहा है। सरकारी केन्द्रों पर अधिक मूल्य वसूल किए जाने के बावत कहीं-कहीं सीधे जबाब किसानों को दिया जा रहा है कि अध्यक्ष को भी इसमें हिस्सा देना पड़ता है। आलू, चना, मटर, सरसों एवं साकभाजी की बुवाई की जरूरत के चलते किसान अधिक मूल्य देना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं, वहीं प्राइवेट दुकानदार अधिक मूल्य वसूल करने का ठीकरा थोक व्यवसायियों पर फोड़ रहे हैं कि अधिक मूल्य देकर लाया हूं जिसके चलते अधिक मूल्य लेना विवशता है। कागजी आंकड़ों पर गौर करें तो अक्तूबर माह में मांग के अनुरूप उपलब्धता नहीं हो पाई है। अक्तूबर माह में यूरिया की मांग 5603 मीट्रिक टन, डीएपी 3764 एमटी, एनपीके 800, एमएसपी 3275 एवं एमओपी की मांग 278 एमटी थी किन्तु मांग के अनुरूप भले ही आपूर्ति नहीं हो पाया। मौजूदा समय में उर्वरकों की उपलब्धता के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले के सहकारिता विभाग एवं निजी क्षेत्र को मिलाकर यूरिया 13801 मीट्रिक टन, डीएपी 3676 एमटी, एनपीके 2576, एमएसपी 10824 एवं एमओपी 524 मीट्रिक टन उपलब्ध होने का दावा कृषि महकमा कर रहा है।डीएपी एवं एनपीके की जिले में किसी प्रकार की कमी नही है। अक्तूबर माह में मांग के अनुरूप भले ही उपलब्धता नहीं हो पाई हो किन्तु अभी भी पर्याप्त मात्रा में प्राइवेट अथवा सरकारी दोनों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमएसपी एवं एमओपी उपलब्ध है। यदि कोई भी दुकानदार अथवा समिति पर अधिक मूल्य वसूल किया जाएगा को तो जांच करने के उपरान्त मामला सत्य पाए जाने पर सम्बंधित के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई किया जाएगा।

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