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*सिस्टम की लापरवाही से बढ़ रहा संक्रमण*

अंबेडकर नगर
*सिस्टम की लापरवाही से बढ़ रहा संक्रमण*
अम्बेडकरनगर। कोरोना महामारी का दबाव स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल के रख दिया है।कोरोना का कहर चरम पर है, जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती गिनती के मरीजों को आक्सीजन उपलब्ध कराने तक का इंतजाम नहीं है। सीएमएस ने आक्सीजन सिलिडर की व्यवस्था कराने के लिए हफ्तेभर पहले उच्चाधिकारियों को फाइल भेजी थी, लेकिन अभी तक उस पर कोई निर्णय नहीं हुआ। लिहाजा, इलाज के अभाव में मरीजों का दम निकल रहा है।अंबेडकरनगर 10 मई । गत वर्ष मार्च महीने से शुरू हुएकोरोना संक्रमण के दौर को अब तक 14 माह बीत चुके हैं, इससे निपटने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए का
भारी भरकम बजट भी दे रखा है लेकिन इन 14 महीनों में यदि तैयारियों के बाबत नजर डाली जाए तो जिले का स्वास्थ्य महकमा आज भी वहीं खड़ा है जहां पर वह 14
महीने पूर्व था। बात चाहे मेडिकल कॉलेज की हो अथवा टांडा में बनाए गए लेबल दो के कोविड अस्पताल की, दोनों ही स्थानों पर व्यवस्था आज भी जस की तस है। यह हाल तब है जब कोरोना संक्रमण की पहली लहर के दौरान ही यह सम्भावना जतायी जा चुकी थी की दूसरी लहर का आना निश्चित है लेकिन पहली लहर के बादहालात जब लगभग सामान्य हो गए तो जिला प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे ने अग्रिम तैयारी किए जाने के बजायचैन की बंसी बजाना शुरू कर दिया था। इसी का परिणाम है कि दूसरी लहर आने के बाद जिला प्रशासनव स्वास्थ्य महकमा केवल हाथ पर हाथ रखकर कागजी खानापूर्ति करने में लगा हुआ है। स्वास्थ्य महकमे की इन तैयारियों की पोल उसके अपने ही आंकड़े खोल रहे हैं । मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अशोक कुमार का कहना है कि टांडा स्थिति एमसीएच विंग में 120 बेड वमेडिकल कॉलेज में ₹300 बेड की व्यवस्था की गई है
लेकिन इन दोनों अस्पतालों में मिलाकर कभी भी डेढ़ सौ से ज्यादा मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकी है। जिला अस्पताल से रेफर किए गए मरीजों को मेडिकल कॉलेज
अथवा एम सी एच विंग में भेजे जाने में भारी लापरवाही बरती जा रही है। संभवत इसी का परिणाम है कि बड़ी
संख्या में लोग ऑक्सीजन व बेड के अभाव में दम तोड़ रहे हैं ।यदि स्वास्थ्य महकमे के आंकड़ों को ही सच मान लिया जाए तो आखिर लोगों को बेड व ऑक्सीजन समय पर क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। करोड़ों रुपये का बजट आखिर खर्च तो कर दिया गया लेकिन व्यवस्थाओं
में कोई बदलाव क्यों नहीं आया। ऐसी कौन सी स्थिति आ गई कि अब जिलाधिकारी को एमसीएच विंग व
मेडिकल कॉलेज में 24 घंटे के लिए मजिस्ट्रेट की तैनाती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे साफ है कि जिला प्रशासन को भी ज्ञात हो गया है कि इन दोनों अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों की भर्ती में
जबरदस्त खेल किये जाने के साथ ही लापरवाही भी बरती जा रही है। इस प्रकार की लापरवाही बरते जाने के
पीछे कौन जिम्मेदार है, तैयारियों को समय रहते ही क्यों नहीं पूरा किया गया इसका जबाब किसी के पास नहींहै। दूसरे दौर के संक्रमण के दौरान सरकार ने मानव शक्ति के सृजन तथा दवाओं की खरीद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को काफी छूट भी प्रदान कर दी है लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई बदलाव देखने कोनही मिल रहे हैं। देखना यह है कि जिलाधिकारी द्वारा मजिस्ट्रेट तैनात किए जाने के आदेश के बाद इन दोनों
कोविड अस्पतालों में अब कोरोना संक्रमित मरीजों को कोई लाभ मिल पाता है अथवा नहीं।

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