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पत्रकारों के साथ क्यों कर रहे हैं दोगला व्यवहार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जमीनी स्तर के पत्रकारों को क्यों नहीं करें फ्रंटलाइन वॉरियर्स घोषित



पत्रकारों के साथ क्यों कर रहे हैं दोगला व्यवहार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जमीनी स्तर के पत्रकारों को क्यों नहीं करें फ्रंटलाइन वॉरियर्स घोषित

नीमच(मप्र):- जहाँ देश में कोरोना महामारी ने भव्य रूप ले रखा हैं वही सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जमीनी स्तर से पत्रकार अपनी जान की परवाह न करते हुए दिन रात कोरोनाकाल में निःशुल्क अपनी सेवाएं दे रहे हैं जिला स्तर तहसील स्तर ग्रामीण स्तर हर जगह से पत्रकारगण अपनी भूमिका पूरी तरह से निभा रहे है उस वक़्त कोई भी पत्रकार ये नही सोचता है कि में अधिमान्य हुँ या गैर अधिमान्य हूँ वह अपने कर्मक्षेत्र में अपना मानवता एवम पत्रकारिता का धर्म निभाते आमजन कल्याण के लिए आवाज उठाता है फिर क्यों प्रदेश के हुक्मरान एक पत्रकार को दूसरे पत्रकार साथी के बीच भेदभाव का बीज डाल रहे है जैसा कि आजकल कई समाचार पत्रो न्यूज़ पोर्टल वेबसाइट पोर्टल यूट्यूब चैनल इत्यादि पर देखने सुनने पढ़ने को मिल रहा है कि प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि पत्रकारों का कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर पत्रकार व उनके परिवार का निशुल्क इलाज करवाएगी तो इसमें कौन सी नई बात की है?? शासन की कई योजनाओं के अंतर्गत एक आमजन का भी निशुल्क इलाज हो रहा है तो फिर पत्रकारों के लिए अलग से क्या है?? उस पर भी एक अंग्रेज नीति "फुट डालो और शासन करो" तर्ज़ पर फुट का बीज "अधिमान्य व गैर अधिमान्य" के नाम पर कौनसा कार्ड खेलना चाहते है मामाजी?? लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के योद्धाओ में आपसी फुट डालकर क्या साबित करता चाहते है प्रदेश मुखिया?? चुनावी दौर में एक छोटी सी ख़बर भी बहुत मायने रखती है आप राजनीतिग्यो के लिए उस वक़्त नही देखा जाता कि कौन अधिमान्य है और कौन गैर अधिमान्य आखिर क्यों??
अभी हाल ही में सूत्र तन्त्रो से प्राप्त जानकारी मिली है कि प्रदेश राजधानी भोपाल में हमीदिया हॉस्पिटल में 850 कोरोना के इंजेक्शन चोरी हुए उनका क्या हुआ? वही हमीदिया हॉस्पिटल से दूसरी मंजिल पर भर्ती कोरोना मरीज छठी मंजिल से कैसे छलांग लगा कर कैसे आत्महत्या कर लेता है क्या इसमें शासन की घोर लापरवाही नहीं दिख रही है ? या इन मामलों की जानकारी माननीय मुख्यमंत्री के संज्ञान में नही है? क्या देश के अंदर कितने पत्रकारों को कोरोना पॉजिटिव होने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया आखिर क्या किया मुख्यमंत्री जी ने ? इस महामारी के दरमियान पत्रकारों के बीच इस तरह का दोगला व्यवहार कर क्या सिद्ध करना चाहते है आखिर ऐसा क्यों कर रहे? मामाजी कई ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें पत्रकार उठाना चाहता है मगर कहीं ना कहीं वोटों की राजनीति में प्रशासनिक दबाव में उसे दबा दिया जाता है और उस केस को ही बंद कर दिया जाता है पत्रकार चाहे ग्रामीण क्षेत्र से ही चाहे नगरीय या शहरी क्षेत्र से हो पत्रकार एक न्याय की आवाज़ होता है ना कि अधिमान्य या गैर अधिमान्य, एक तरफ तो माननीय प्रधानमंत्री देश को डिजिटल इंडिया बनाना चाहते है 5g लाकर देश को और विकासशील बनाना चाहता है वही दूसरी और प्रदेश मुखिया को इलेक्ट्रॉनिक वेब यूट्यूब मीडिया से परहेज़ क्यो?? यदि प्रदेश मुखिया शिवराज सिंह चौहान पत्रकारों को फ्रंटलाइन वारियर्स घोषित नहीं करते हैं तो हो सकता है अभी मांगे नही माने गैर अधिमान्य पत्रकार अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए कई कदम उठा सकते हैं इसलिए पत्रकारों की आवाज को सुनकर देश के  प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री घोषणा करें कि सभी पत्रकारों को जनसंपर्क कार्यालय द्वारा एक सूची बनाकर चाहे वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो चाहे वह न्यूज़ पोर्टल वेब पोर्टल मीडिया चाहे वह अधिमान्य हो या गैर अधिमान्य सबको एक प्लेटफार्म पर एक समान दर्जा देकर घोषणा करें और सभी को जो एक समान पत्रकार सुरक्षा कानून सहित लाभ मिले मामाजी आप जनता के प्रतिनिधि है लेकिन जनता की आवाज़ उठाने वाले हम बिना वेतन के जनसेवक है इसलिए दोगलापन दूर करो और सभी पत्रकारगण को फ्रंट लाइन योद्धा घोषित करो.


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