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*माननीय हों या प्रशासन सख्ती मैदान में कितनी है कोई झांककर देखने वाला नहीं*

अंबेडकर नगर
*माननीय हों या प्रशासन सख्ती मैदान में कितनी है कोई झांककर देखने वाला नहीं*
अम्बेडकरनगर। सुबह होते ही जिला मुख्यालय सब्जी मंडियों व किराना दुकानों में शारीरिक दूरी का नजर अंदाज कर लोग खरीदारी में मशगूल हो जा रहे हैं। एक दूसरे के बीच दो गज की दूरी कही नहीं दिख रही है। ग्राहक मास्क जरूर पहने रहते है लेकिन दुकानदार का मास्क फेस की जगह गले में लटकता रहता है।किसी सब्जी मंडी के दुकान पर सैनिटाइजर,साबुन या हैंडवश रखना तो दूर हाथ धोने के लिए पानी भी नहीं रखते। इसके अलावा शहर केपटेलनगर,अकबरपुर,अन्नावां कटेहरी, तथा  अहिरौली में अवस्थित सब्जी मंडी में पुलिस पर नजर नहीं पड़ती है। बताते चलें कि पिछले वर्ष शारीरिक दूरी को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक मंडी में पुलिस प्रशासन या नगर निगम के कर्मचारी का कड़ा पहरा लगा होता था। ग्राहक या सब्जी के लिए वाहन से निकलने वाले लोगों को कोरोना का गाइडलाइन की जानकारी देते रहते हैं। सबसे अधिक समस्या उनलोगों को उठानी पड़ रही जो रेल के माध्यम से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा सहित अन्य जगहों से अकबरपुर स्टेशन पहुंच रहे हैं। लेकिन स्टेशन से उन्हें अपने घर जाने के लिए कोई वाहन नहीं मिल रहे हैं। वे लोग किसी तरह अपने घर जाने मजबूर दिख रहे है। आवश्यक सेवाओं को छोड़ सभी वाहन बंद है। ऐसे में कोई भी वाहन चालक रिस्क लेना नहीं चाह रहे हैं।तो वहीं दूसरी तरफ कोरोना कर्फ्यू और धारा 144 के आदेश कागजों में भले ही हो गए हों, लेकिन सड़कों पर इसका कोई असर नहीं है। बाजारों में भीड़ है लोग छिपते-छिपाते सामान ले रहे हैं और दुकानें भी आधी खुली रहती हैं। कुछ दुकानों के आगे दुकानदार शटर आधा बंद कर खड़े हो जाते हैं और दाएं-बाएं से सामान देते हैं। जिला प्रशासन ने जो सुबह के समय छूट दे रखी है वह तो दिखावा बन गई है। हर बाजार गली में दुकानों से सामान और जमकर आवाजाही अब आदत सी बन गई है। पुलिस के बैरिकेड जरूर अलग-अलग जगह लगाए गए हैं, लेकिन खड़े होकर आने जाने वालों को देखने के अलावा पुलिस कुछ नहीं कर रही है।पिछले कई दिनों से प्रशासन का कार्रवाई का आंकड़ा सामने ही नहीं आ रहा है। *इतने हालात बिगड़े,तब भी ढिलाई,ये खतरनाक हैः* कोरोना संक्रमण के भीषण हालात को रोकने के लिए ही जिला प्रशासन और पुलिस ने सख्ती की रणनीति बनाई और कोरोना संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव की बैठक में भी सख्ती के दावे किए गए। माननीय हों या प्रशासन सख्ती मैदान में कितनी है कोई झांककर देखने वाला नहीं है। खुलेआम सुबह से मंडी से लेकर शहर की सड़कों तक आवाजाही शुरू हो जाती है। पुलिस और प्रशासन चंद एफआइआर और चालान करके अपना पल्ला झाड़ लेता है।चालान हल नहीं, सख्ती करके बढ़ाएं उपस्थितिः पुलिस और प्रशासन का काम चालान करके आंकड़े दिखाना नहीं है, बल्कि ऐसी महामारी के दौर में सड़कों व बाजारों में लेागों को रोकने के लिए अपनी उपस्थिति दिखाना जरूरी है। न पुलिस के सायरन बजाते वाहन दिखते न इंसीडेंट कमांडर अपने वाहनों से माइक के माध्यम से लोगों को रोकते हैं। कलेक्टर और एसपी ने कितनी भी व्यवस्था बना दी हो लेकिन पालन कुछ नहीं हो रहा है।

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