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*कई विपणन सहायक अल्प समय में ही हो गये सुख-सुविधा सम्पन्न लखपति*




कई विपणन सहायक अल्प समय में ही हो गये सुख-सुविधा सम्पन्न लखपति*

*विपणन सहायकों के इशारों पर ही काम करते हैं कई एम.आई.*


जिले के खाद्यान्न गोदाम पर नियुक्त विपणन सहायक और मार्केटिंग इंस्पेक्टर्स में कितना आपसी तालमेल है, इसके बावत भी तरह-तरह की चर्चाएँ सुनने को मिल रही हैं। अम्बेडकरनगर के खाद्य विपणन महकमा के इंस्पेक्टर्स और विपणन सहायकों की मिलीभगत से अधिकांश गोदामों पर भण्डारित खाद्यान्न बोरियाँ तस्करों के माध्यम से कालाबाजार में पहुँचाई जा रही हैं। जहाँ ताल-मेल नहीं है वहाँ आपसी खींचा-तानी के चलते इनके अन्य से सम्बन्ध बिगड़ रहे हैं और साथ ही धन कमाई मे बाधा आ रही है (ऐसी चर्चाएँ हैं)।  खाद्य विपणन निरीक्षक और विपणन सहायक के आपसी तालमेल के बावत भी कई जानकारियाँ मिली हैं।
आलापुर तहसील के हुसैनपुर खुर्द गोदाम पर एक निजी तौर पर रखे गये सहायक और प्रभारी के बीच बोरियों के वितरण में मनमानापन को लेकर काफी झगड़ा-फसाद हो गया था। इस प्रकरण में तत्समय नियुक्त एम.आई. ने उक्त कर्मी को गोदाम से हटा दिया था। आरोप लगाया था कि वह उन्हें ओवर टेक करके कोटेदारों और अपने खासम-खास को लाभ पहुँचाने लगा था। उस समय चर्चा थी कि खाद्य विपणन निरीक्षक और क्षेत्रीय निजी सहायक आपस में लेन-देन को लेकर प्रायः तू-तू, मैं-मैं और झगड़ा-झंझट करते रहते थे। इसे देखकर गोदाम पर आने-जाने वाले कोटेदारों और अन्य लोगों को बड़ा अजीब लगता था। साथ ही विभाग की छवि भी खराब हो रही थी।
बताया जाता है कि तहसील/ब्लाक में स्थापित खाद्यान्न गोदामों पर तैनात एम.आई. (प्रभारी) और विपणन सहायक बोरियों में रखे हुए खाद्यान्नों की गुणवत्ता और वजन की चेकिंग में भी कोई रूचि नहीं लेते हैं। यही कारण है कि कोटेदारों को मिलने वाले बोरियों में कम वजन का घटिया खाद्यान्न मिलता है। इस स्थिति में अक्सर कोटेदार और मार्केटिंग महकमे के इन जिम्मेदारों में तू-तू, मैं-मैं होती देखी जाती है। डिप्लोमैटिक स्टाइल में धन कमाऊ मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के मुलाज़िम झगड़ा आगे न बढ़े इसलिए अपने तरीके से सब कुछ मैनेज कर लेते हैं, भले ही उनके इस कृत्य से गरीबों, पात्रों को हानि पहुँचे।
लगभग एक वर्ष पूर्व जिले में एक डिप्टी कलेक्टर ऑफिसर तैनात हुए थे, उनकी तैनाती टाण्डा उपजिलाधिकारी के रूप थी, वह तेज-तर्रार थे। उनको गरीबों की पीड़ा का एहसास था। वह स्वयं सूरापुर, टाण्डा स्थित खाद्यान्न के बड़े गोदामों पर औचक निरीक्षण किया करते थे। उनके समय में मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के लुटेरे इंस्पेक्टर्स और गोदामों पर तैनात विपणन सहायक भयाक्रान्त रहते थे। एस.डी.एम. टाण्डा गोदामों में रखी खाद्यान्न की एक-एक बोरियों की गिनती करते थे और खुलवाकर खाद्यान्नों की गुणवत्ता और बोरियों का वजन चेक करते थे। उनके इस कार्य से अधिकारियों में खलबली मची हुई थी।
परोक्ष रूप से मार्केटिंग डिपार्टमेन्ट के लुटेरे कर्मचारी ऊपर वाले से यह दुआ करते थे कि किसी तरह जल्द ही ऐसे डिप्टी कलेक्टर का यहाँ से तबादला हो जाये। एस.डी.एम. टाण्डा के कार्य से खाद्य विपणन महकमा के सभी अधिकारी खौफजदा थे।
जिले के कई स्थानों पर अवस्थित विभागीय खाद्यान्न गोदामों पर तैनात विपणन सहायक अल्प समय में ही सुख-सुविधा सम्पन्न हो गये हैं। इनके पास समस्त भौतिक सुख-सुविधाएँ, लग्जरी गाड़ियाँ और ऐशो-आराम की सभी चीजें उपलब्ध हो गईं। यह सब कहाँ से आया इसके उत्तर में यही कहा जाएगा कि फूड मार्केटिंग महकमा और खाद्यान्न गोदाम इनके लिए उपजाऊ बना हुआ है। इनके गाँव और उन मोहल्लों में जहाँ ये रहते हैं के लोग इनके रूतबे-रूआब और धन-वैभव के साक्षी हैं। चन्द समय में ही लाखों की चल-अचल सम्पत्ति अर्जित कर वैभवशाली जीवन जीने वाले इन विपणन सहायकों का रौला है। लोगों का कहना है कि जब ये लोग इतने पैसे वाले हैं तब इनके ऊपर के विभागीय ओहदेदार कितने रईश होंगे।

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