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Taj Mahal: 84 दिनों से ताले में कैद है मोहब्‍बत की निशानी, जानिए पहलेे भी कब मिल चुका है बंदी का दंश

शहंशाह शाहजहां और बेगम मुमताज महल की अजीम मुहब्‍बत की सदियों से दास्‍तां बयां करती आ रही सफेद संगमरमरी इमारत ताजमहल 84 दिनों से ताले में कैद है। हां बेशक, रखरखाव में कोई कमी नहीं आई है लेकिन पर्यटकों से गुलजार रहने वाला ताज का आंगन कोरोना महामारी के कारण सूना है। अपने हुस्‍न के कद्रदानों की बस अथक राह देख रहा है। रविवार को केंद्र सरकार की गाइड लाइन का अनुसरण संस्‍कृति मंत्रालय ने देश के 820 स्‍मारक खोले जाने के आदेश दे दिए लेकिन आगरा के ताजमहल सहित सभी 14 स्‍मारकों को लॉकडाउन की बंदिशों से आजादी नहीं मिली। इसका एकमात्र कारण कोरोना वायरस का ताजनगरी पर प्रभाव है। ताज सहित अन्‍य स्‍मारकों की बंदी एहतियतन जरूर है लेकिन इसके साथ सन 2020 सदैव के लिए इतिहास के पन्‍नों में दर्ज हो जाएगी। इसके पीछे कारण ताजमहल के इतिहास में इतनी लंबी बंदी है। हांलाकि ताजमहल इससे पहले भी दो बार बंद हो चुका है। जबकि अन्‍य स्‍मारक पहले ही बार बंद हुए हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए देशभर के स्मारकों को 31 मार्च तक के लिए बंद किया गया था। अब 84 दिन हो चुके हैं। देश के अन्‍य एतिहासिक स्‍मारक खोले जा चुके हैं लेकिन आगरा में कोरोना का कहर अधिक होने के कारण यहां के 14 स्मारकों को फिलहाल बंद ही रखने के आदेश दिए गए हैं।

आगरा में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, सिकंदरा, एत्माद्दौला, रामबाग, मेहताब बाग समेत कई स्मारक हैं। संस्कृति मंत्रालय ने कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए 17 मार्च की सुबह सभी स्मारकों को बंद करा दिया था। 31 मार्च तक के लिए सभी स्मारक, संग्रहालय व पर्यटन स्थल बंद किए गए थे। इसके बाद लॉकडाउन की अवधि बढ़ने के साथ स्‍मारकों की बंदी भी बढ़ती गई। लॉकडाउन अनलॉक भी हुआ लेकिन आगरा के स्‍मारक अनलॉक नहीं हुए।


ताजमहल इससे पूर्व दो बार हुआ बंद

ताजमहल इससे पूर्व दो बार बंद हो चुका है। वर्ष 1971 में ताज के संरक्षण सहायक रहे (अब सेवानिवृत्त) एसके शर्मा के अनुसार 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान ताजमहल चार दिसंबर से 18 दिसंबर तक 15 दिन के लिए बंद हुआ था। तब अन्य स्मारक खुले रहे थे। ताज के वरिष्ठ संरक्षण सहायक रहे आरके दीक्षित बताते हैं कि वर्ष 1978 में सितंबर में यमुना में बाढ़ के चलते सात दिन ताज बंद रहा था। इसके बाद कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए एहतियातन ताजमहल 17 मार्च 2020 को बंद किया गया।


भारत- पाक युद्ध में बंदी का यह था कारण

वर्ष 1971 में ताज के संरक्षण सहायक रहे (एएसआइ से सेवानिवृत्त हो चुके) एसके शर्मा बताते हैं कि ताज यमुना किनारा पर होने की वजह से बड़ी इमारत के रूप में हवाई जहाज से नजर आता था। पाकिस्तान के जहाज इसके आधार पर एयरफोर्स की दूरी का आकलन नहीं कर सकें, इसके लिए ताज को कवर से ढक दिया गया था। चार दिसंबर से 16 दिसंबर तक युद्ध हुआ था। इसके बाद दो दिन साफ-सफाई किए जाने से पर्यटकों को प्रवेश नहीं दिया गया था। तब पेड़ों की टहनियों से ताजमहल परिसर को घने जंगल का रूप दिया गया था, जिससे कि किसी को पता नहीं चले। उस समय अन्य स्मारक खुले रहे थे।

बाढ़ में ये हुआ था हाल

ताजमहल के संरक्षण सहायक रहे (सेवानिवृत्त हो चुके) आरके दीक्षित बताते हैं कि वर्ष 1974 में ताज में उनकी तैनाती हुई थी। वर्ष 1978 में यमुना में बाढ़ आई थी, तब वो स्मारक में केयरटेकर के पद पर तैनात थे। उस समय ताजमहल की यमुना किनारा बनी कोठरियों में पानी भर गया था। शहरवासी ताज से यमुना में पानी को देखा करते थे। तब ताजमहल को सात दिन बंद किया गया था।

 *रिपोर्ट | भोवन सिंह ब्यूरो चीफ आगरा उ0प्र0*

( *NEWS 24 INDIA न्यूज चैनल*)

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