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योग प्राणायाम व ध्यान पर आधारितऑन-लाइन वेबिनार योग - भारतीय जीवन पद्धति है बाबा रामदेव जी news 24 India

‘नमस्ते योगा’ 
योग प्राणायाम व ध्यान पर आधारितऑन-लाइन वेबिनार योग - भारतीय जीवन पद्धति है बाबा रामदेव जी 
प्रयागराज,
२० जून।

योग, भारत के आमजन की सनातन जीवन पद्धति है। योग योगी की चिकित्सा पद्धति है, योग राजयोगी के लिए महत्वपूर्ण है, पूरा जीवन ही योग है, समृद्धि और वृद्धि योग के पीछे-पीछे दौड़ती है। योग मानव जाति के कर्म कौशल का एक दूसरा नाम है- योगः कर्मसु कौशलम्।
यह उद्गार विश्व प्रसिद्ध योगाचार्य स्वामी बाबा रामदेव ने उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग, प्राणायाम व ध्यान विषय पर आधारित ‘नमस्ते योगा’ कार्यक्रम में व्यक्त किया। 
उन्होंने कहा कि योग सबसे बड़ी शक्ति और वैभव है, योग यौवन की उर्जा हैं। मैं तो धर्म की सेवा करता हूँ और भारतीय ऋषि परम्परा द्वारा पोेषित योग के माध्यम से जीवन में नैतिकता के पालन का संदेश देता हूँ। यह नैतिकता और सदाचरण योग से ही संभव है। अपने प्रिय भजन ‘प्रभु आशीष दो हमको-तुम्हारा यंत्र बनजायें’ का स्मरण करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि सबल, सम्पन्न व उर्जावान भारत के लिए योग सबसे बड़ा साधन है। केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर द्वारा वर्तमान समय में व्याप्त कोविड-१९ से बचाव के संदर्भ में पूछे प्रश्न पर स्वामी जी ने कहा कि हमें श्वसन सम्बन्धी योग क्रियाओं, प्राणायाम, अनुलोम-विलोम को करना होगा। इससे हमारी शारीरिक उर्जा बढ़ेगी और हम इस महामारी को दूर करने में अवश्य सफल होंगे। 
युवा योग गुरू आनंद गिरि द्वारा युवाओं में बढ़ते अवसाद व आत्म हत्या की घटनाओं के संदर्भ में एक प्रश्न पर स्वामी रामदेव जी ने कहा कि भौतिक सुख आधुनिक दिनचर्या, भोगवादी प्रवृत्ति युवाओं को अवसाद की ओर ले जा रही है। इसे नैतिक शिक्षा व नियमित योग से ही दूर किया जा सकता है। युवाओं को कम से कम एक योग क्रिया  और व्यायाम करने की सलाह देते हुए स्वामी जी ने कहा कि ऐसा करने से वैचारिक सोच, आन्तरिक उर्जा और सकारात्मक सोच का विकास होगा। डॉ दीप्ति योगेश्वर द्वारा जीवन में योग्य गुरू की उपयोगिता से सम्बन्धित प्रश्न के उत्तर में स्वामी जी ने कहा ‘‘जीवन में चित्र नही चरित्र की पूजा होनी चाहिए।’’ गुरू वही है जो अपने अनुभव से सिखाएं, सदाचरण से युक्त आचार्य ही गुरू हो सकता है। स्वामी जी ने वेबिनार में उपस्थित वक्ताओं निशांत उपाध्याय, डॉ प्रबुद्ध मिश्र, अमित सिंह आदि के प्रश्नों का भी बहुत सहजता से उत्तर दिया और कहा कि आज के संदर्भो में युवाओं के लिए नैतिक शिक्ष का महत्व बढ़ जाता है। नैतिक शिक्षा की दिशा में पतंजली योग पीठ द्वारा प्रयास किया जा रहा है। 
वेबिनार में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रयागराज के कोषाधिकारी निशांत उपाध्याय ने कहा कि ईश्वर आराधना और योग भारतीय जीवन पद्धति के मूल रहे हैं। आज इससे भटकाव हमारी दुर्दशा का कारण है। हमे स्वस्थ्य जीवन और नैतिक भारत के लिए योग को जीवन में ढालना होगा। 
 योग गुरू आनंद गिरि ने कहा कि भोगवादी संस्कृति का प्रभाव ही आज के वर्तमान दौर का सबसे बड़ा शत्रु है। युवाओं में बढ़ता अवसाद और आत्महत्या योग के द्वारा दूर की जा सकती है। उन्होंने जीवन को नैतिक बनाने और कोविड-१९ से बचाव के लिए योग को अपने दिनचर्या में ढालने का संदेश दिया। जौनपुर के योग शिक्षक अमित सिंह ने कहा कि आज हर व्यक्ति जीवन में खुशी चाहता है लेकिन खुशी बिना योग अपनाये संभव नही है। योगाचार्य प्रबुद्ध मिश्र ने भौतिक सुखों की अतृप्त इच्छा को आज के दुःखों का कारण बताया और कहा कि इसका निरोध योग से ही सम्भव है। 
डा० दीप्ति योगेश्वर ने कहा कि योग आदिदेव महादेव द्वारा लोकहित में किया गया। वे आदि योगी है। जीवन में वास्तविक आनन्द योग से ही मिलता है। योग शारीरिक रोगों को जड़ से समाप्त करता है। वेबिनार में अन्य वक्ताओं ने योग पर प्रकाश डाला उनमें जय सिंह, अखिलेश तिवारी प्रमुख है। 
वेबिनार के पूर्व केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर ने आगत वक्ताओं एवं बाबा रामदेव जी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि योग दिवस के अवसर पर स्वामी जी का उद्बोधन हमारे लिए अद्भुत है और इसका लाभ सभी को मिलेगा। आज के इस संक्रमण समय में केन्द्र के वेबिनार नमस्ते योगा कार्यक्रम में योग, प्रणायाम व ध्यान पर आधारित कार्यक्रम में स्वामी जी का विचार हमें मानसिक व नैतिक सम्बल प्रदान करेगा। उन्होंने वेबिनार में विचार रखने वाले सभी वक्ताओं का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम अधिशाषी मधुकांक मिश्रा ने किया तथा संचालन अखिलेश तिवारी ने किया। 
दिनांक २१ जून २०२० को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर केन्द्र द्वारा ऑन लाइन योग कार्यक्रम का केन्द्र के फेसबुक एवं यू ट्यूब पर सजीव प्रसारण किया जायेगा।

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