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CoronaVirus को हराना है तो करें ये आसन, जानिए क्‍या है करने का सही तरीका

किसी भी तरह के वायरल संक्रमण से हमारा श्वसन तंत्र, खासकर एलवियोलाई (फुफ्फुस कोशिकाएं) सर्वाधिक प्रभावित होती हैं। ऐसे में श्वास-प्रश्वास की क्रिया को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से सुबह-शाम प्राणायाम का अभ्यास जरूरी है। ऐसा कर हम अपनी सांसों के जरिये फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन पहुंचाते हैं। जो लाल व श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या तो बढ़ाती ही है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत करती है। शरीर के सुरक्षा तंत्र में इन रक्त कोशिकाओं की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। योगा एक्‍सपर्ट सारिका गुप्‍ता के अनुसार प्राणायाम प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही हृदय और मानसिक रोग, अनिद्रा, डिप्रेशन और क्रोध को शांत करने में मददगार है। मन की चंचलता दूर कर एकाग्रता बढ़ातेे हैंं। इससे मस्तिष्क की नसों को आराम मिलता है। सभी प्रमुख प्राणायाम में भस्त्रिका और अनुलोम विलोग सबसे पहले आते हैं। ये दोनो प्रणायाम ऐसे हैं जिन्‍हें आप आसानी से कर सकते हैं।

प्राण वायु के लिए भस्त्रिका प्राणायाम करें

सारिका बताती हैं कि भस्त्रिका प्राणायाम से शरीर को प्राण वायु अधिक मात्र में मिलती है। इससे शरीर के सभी अंगों से दूषित पदार्थ बाहर निकल आते हैं। तेज गति से श्वास लेने और छोड़ने के क्रम में हम ज्यादा मात्र में ऑक्सीजन लेते हैं और कॉर्बन डाईऑक्साइड छोड़ते हैं। यह प्रक्रिया फेफड़ों की कार्यक्षमता तो बढ़ाती ही है, हृदय में रक्त नलिकाएं भी शुद्ध और मजबूत बनती हैं। भस्त्रिका प्राणायाम करते समय हमारा डायाफ्राम तेजी से काम करता है, जिससे पेट के अंग मजबूत होकर सुचारू रूप से कार्य करते हैं और हमारी पाचन शक्ति सुदृढ़ होती है।

ऐसे करें किसी आरामदायक आसन पद्मासन या पालथी मारकर बैठ जाएं। फिर मेरुदंड और सिर को सीधा रखें। आंखें बंद करें। पूरा शरीर शिथिल करें। गहरी श्‍वास लें और नासिका से बलपूर्वक श्‍वास छोड़ें। तुरंत बाद उतनी तेजी से श्‍वास लें और फिर छोड़ें। दस बार ऐसा करें। यह एक चक्र है। पांच चक्र तक इसका अभ्‍यास करें। 

नाड़ी शोधन के लिए अनुलोम विलोम प्राणायाम


अनुलोम-विलोम को सबसे प्रमुख प्राणायाम माना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से नाड़ी शोधन होने के साथ शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन भी मिलती है। जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही मन भी प्रसन्न रहता है। साथ ही असंख्य बीमारियों का धीरे-धीरे नाश होने लगता है।

ऐसे करें

दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए। अब अनामिका अंगुली से बाई नासिका को बंद कर दें। इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें। अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड दें। दूसरी बार में आप जिस नासिका से सांस छोड़ रहे हैं उसी से दोबारा सांस को अंदर लेकर दूसरी नासिका से छोड़ना है।


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