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श्वसन सम्बन्धी विकारों के लिए उपयोगी है अर्धचंद्रासन-योग शिक्षक महेश कुमार

अर्ध चंद्रासन करने का तरीका - 
अर्ध का अर्थ आधा और चंद्रासन का मतलब चंद्र के समान किया गया आसन। इस आसन को करते समय शरीर का आकार अर्ध चंद्र के समान हो जाता है, इसलिए इसे अर्ध चंद्रासन कहा जाता है। इस आसन का आकार त्रिकोण के समान भी बनता है तो इसे त्रिकोणासन भी कह सकते हैं, क्योंकि दोनों आसन को करने में कोई खास अंतर नजर नहीं आता। इस आसन को खड़े होकर किया जाता है।
 अर्ध चंद्रासन के लाभ-
यह अभ्यास संतुलन विकसित करता है और शरीर के आगे वाले भाग में खिंचाव उत्पन्न करता है।
यह आसन पूरे शरीर को लचीला बनाता है।
यह गर्भाशय और मूत्र नली से संबंधित स्त्री रोगों में विशेष रूप से लाभकारी होता है।
यह आसन छाती और गर्दन को पर्याप्त खिंचाव प्रदान करता है, जिससे श्वसन सम्बन्धी समस्याओं, गले की खराश, टॉन्सिलाइटिस, खांसी और सर्दी से आराम पहुंचता है।
सावधानियां-

अगर आपको चक्कर की समस्या रहती है तो इस आसान को न करें।
लो ब्लड प्रेशर वाले इस आसन को न करें।
अगर आपको कमर दर्द या गर्दन में दर्द की समस्या है तो इस आसन को नजरअंदाज करें।
आसान को करते समय अगर आपको सिर दर्द महसूस होता है तो इसे तभी बंद कर दें।
डायरिया से पीड़ित व्यक्ति इस आसन को न करें।
रिपोर्ट-प्रेम चंद्र न्यूज़24 इंडिया प्रयागराज यू0पी0

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