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*संकल्प के सूरज कुमार ने विद्यालयों में फीस माफी के लिए छेड़ा मुहिम*

*संकल्प के सूरज कुमार ने विद्यालयों में फीस माफी के लिए छेड़ा मुहिम*


*सेन्ट पीटर्स व अन्य महंगे स्कूल नहीं कर रहे हैं फीस माफी की घोषणा*

*फीस माफी तक जारी रहेगी युवा समाजसेवी की यह मुहिम*

*न्यूज़ 24 इंडिया अम्बेडकर नगर*
*रिपोर्टर बजरंगी मोदनवाल*

अम्बेडकरनगर जनपद की प्रमुख समाजसेवी संस्था संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक, युवा समाजसेवी सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता जो रक्त योद्धा के नाम से जाने जाते हैं अब वह स्कूलों में बच्चों की फीस माफ कराये जाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने महंगे अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयो के प्रबन्धतन्त्र/प्रधानाचार्यों को पत्र भेजकर कोविड 19 के संक्रमण से बचाव हेतु देश भर में चल रहे लाकडाउन का हवाला देकर 3 माह (अप्रैल, मई, जून) की फीस माफ किये जाने की मांग किया है। सूरज के इस पहल की व्यापक रूप से प्रशंसा की जा रही है। छात्र-छात्राओं और अभिभावकों को प्रतीत होने लगा है कि इस संकट की घड़ी में कोई तो ऐसा है, जो उनकी समस्या के निराकरण हेतु प्रयासरत है। 

हालांकि सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता का यह कहना है कि ऐसा करके वह कोई एहसान नहीं कर रहे हैं अपितु पूर्व में प्रदेश सरकार और माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव स्तर से इस बात का संकेत दिया गया था कि लाकडाउन की स्थिति में तीन माह की फीस विद्यालयों द्वारा न ली जाये। परन्तु इसका जब कोई प्रभावी असर नही पड़ा और तमाम विद्यालयों द्वारा मैसेज व कॉल करके फीस मांगी जाने लगी, तब उन्होंने फीस माफी को लेकर मुहिम शुरू करने का बीड़ा उठाया।न्यूज़ 24 इंडिया से बात करते हुए सूरज कुमार ने कहा कि उनके इस मुहिम का असर कुछ न कुछ पड़ने लगा है। 

जिला मुख्यालयी शहर अकबरपुर में स्थित सेन्ट जॉन्स स्कूल के प्रबन्धक/प्रधानाचार्य तथा अन्य स्टाफ ने कहा कि विद्यालय द्वारा किसी भी प्रकार का मैसेज या कॉल फीस के लिए नहीं किया जा रहा है। जो अभिभावक स्वतः स्वेच्छा से फीस दे रहे हैं उनसे भी हम फीस नहीं ले रहे हैं। सेन्ट जॉन्स स्कूल के प्रबन्धतन्त्र का कहना है कि लाकडाउन के बाद शासन का जैसा दिशा-निर्देश होगा वैसा किया जायेगा।

इसी तरह जब उन्होंने विवेकानन्द शिक्षा संस्थान अमरौला, सिझौली, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर के प्रबन्धक से बात किया तो फीस माफी के बावत विद्यालय के प्रबन्धक विमलेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोनू ने कहा कि हमने अपने विद्यालय में पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं की 3 माह (अप्रैल, मई, जून) की पूरी फीस माफ कर दी है। इसके अलावा अनेकों विद्यालयों में तीन माह की फीस न लिये जाने की घोषणा कर दी गई है। परन्तु अकबरपुर के प्राचीन सर्वाधिक महंगे, अंग्रेजी माध्यम के विद्यालय सेन्ट पीटर्स स्कूल द्वारा लगातार कॉल और मैसेज के माध्यम से अभिभावकों पर फीस देने का दबाव बनाया जा रहा है। इस विद्यालय द्वारा किये जा रहे मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न से त्रस्त अभिभावक अवसादग्रस्त होने लगे हैं। सूरज गुप्ता ने कहा कि बीते 1 माह से वह सेन्ट पीटर्स स्कूल अकबरपुर के प्रधानाचार्य और प्रबन्धतन्त्र से मिलकर फीस माफी के बावत वार्ता करने का प्रयास कर हैं परन्तु अभी तक विद्यालय के प्रधानाचार्य या फिर किसी सक्षम पदाधिकारी से मुलाकात सम्भव नहीं हो सकी है। सेन्ट पीटर्स स्कूल के मुख्य द्वार पर खड़ा रक्षक हर आगन्तुक और मिलने वालों के बावत पूरी जानकारी प्राप्त करता है इसके उपरान्त जब प्रधानाचार्य का आदेश होता है या फिर वह जिससे मिलना चाहते हैं उसे अन्दर बुलाया जाता है। 

युवा समाजसेवी ने कहा कि उन्होंने जब भी सेन्टपीटर्स स्कूल में जाकर प्रधानाचार्य या सक्षम पदाधिकारी से मिलने का प्रयास तो असफलता ही हाथ लगी। इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि इस विद्यालय में अंग्रेजी के नाम पर महंगी फीस और अभिभावकों का शोषण ही किया जाता है। हालांकि उन्होंने सेन्ट पीटर्स और अन्य महंगे स्कूलों में फीस माफी को लेकर प्रदेश के मुख्यमन्त्री को मांग-पत्र भेजा था, साथ ही उसकी एक प्रति जिलाधिकारी, अम्बेडकरनगर को भी प्रेषित किया था। नतीजा अभी तक सिफर ही रहा। ऐसे में निरंकुश सा बने ये सभी विद्यालय और उसके प्रबन्धतन्त्र मनमाना तरीका अपनाये हुए हैं। लाकडाउन में जबकि विद्यालय पूरी तरह से बन्द हैं, और कहने मात्र को ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है, ऐसे में विद्यालयों द्वारा बराबर फीस की मांग करना और छात्रों व अभिभावकों पर दबाव बनाना कहाँ तक उचित है। 

संकल्प मानव सेवा संस्था के संस्थापक सूरज कुमार उर्फ बन्टी गुप्ता ने कहा कि जून 2020 में लाकडाउन-05 यानि अनलॉक-01 चलने लगा है। अभी तक सेन्ट पीटर्स स्कूल व कतिपय अन्य महंगे विद्यालयों ने फीस माफी सम्बन्धी अपनी मंशा स्पष्ट नहीं किया है। यह अत्यन्त शोचनीय विषय है। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी है। उनके द्वारा जनहित में चलाई जा रही फीस माफी मुहिम जारी है, और यह तब तक चलेगी, जब तक ऊँट किसी करवट नहीं बैठ लेता। सूरज कुमार ने अभी हौंसला नहीं छोड़ा है। फीस माफी जैसे मुहिम का बीड़ा जो इनके द्वारा उठाया गया है, उसके मद्देनजर इनका कहना है कि सेन्ट पीटर्स स्कूल और इसी तरह के अन्य महंगे स्कूलों द्वारा छात्र-छात्राओं की फीस अवश्य ही माफ की जायेगी। युवा समाजसेवी का जज्बा देखकर व उसकी बातें सुनकर प्रतीत होता है कि आर्थिक रूप से लगभग टूट चुके अभिभावकों को राहत जरूर मिलेगी।

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