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प0 राम प्रसाद बिस्मिल को श्रद्धान्जलि-एडवोकेट इकबाल अंसारी

एडवोकेट इक़बाल अंसारी ( प्रवक्ता - सेंट्रल पीस कमेटी) की ओर से
शहीद रामप्रसाद बिस्मिल साहब को श्रद्धांजलि.. 
राम प्रसाद बिस्मिल की कहानी अशफ़ाक़ उल्ला खान के  के बिना अधूरी है। एक जैसी सोच और सिद्धान्त रखने वाले इन दोनों दोस्तों के दिल में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी हुई थी। दोनों साथ रहते थे, साथ काम करते थे और हमेशा एक दूसरे का सहारा बनते थे। बिस्मिल ने अपनी आत्मकथा में एक पूरा अध्याय अपने परम मित्र अशफ़ाक़ को समर्पित किया है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है ज़ोर कितना बाजु-ए-कातिल में है?
करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है।
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां!
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है?
खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैयार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
हाथ जिनमें हो जुनूँ, कटते नही तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न
जाँ हथेली पर लिये लो बढ़ चले हैं ये कदम
ज़िंदगी तो अपनी मेहमाँ मौत की महफ़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
यूँ खड़ा मक़तल में कातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है?
दिल में तूफानों की टोली और नसों में इंक़लाब
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।
जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खून-ए-जुनूँ
क्या लड़े तूफाँ से जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है।
रिपोर्ट-ब्यूरो चीफ न्यूज़24 इंडिया प्रयागराज यू0पी0

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