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बड़ी खबरगोयरा थाना अंतर्गत रामपुर घाट से हो रहा निरंतर उत्खनन और परिवहन गोयरा थाना प्रभारी देते हैं रेत माफियाओं को खुला संरक्षण

बड़ी खबर
गोयरा थाना अंतर्गत रामपुर घाट से हो रहा निरंतर उत्खनन और परिवहन गोयरा थाना प्रभारी देते हैं रेत माफियाओं को खुला संरक्षण

*जिला छतरपुर मध्य प्रदेश/चंदला* - गोयरा थाना क्षेत्र में रेत माफियाओं का हमेशा जमावड़ा लगा रहता है मगर कोरोना वायरस के चलते जिला प्रशासन ने रेत के कारोबार पर लगाम खींच कर रखी थी कलेक्टर शीलेंद्र सिंह द्वारा जारी आदेश में यह साफ शब्दों में लिखा था कि जिले में किसी प्रकार का रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन नहीं किया जाएगा अगर किसी थाना क्षेत्र से इस प्रकार की गतिविधि पाई गई तो संबंधित थाना प्रभारी पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी मगर पैसों की खनक के आगे कलेक्टर के आदेश धरे के धरे रह गए रेत माफियाओं ने भ्रष्ट अधिकारियों से सांठगांठ कर सरकारी काम के नाम पर स्वीकृति हासिल कर अपने रेत के अवैध गोरखधंधे को वैध बनाने का भरसक प्रयास किया और सफल भी रहे क्या केवल एक ही खदान के द्वारा सरकारी कार्य किए जाते हैं या एक ही व्यक्ति को रेत चलाने की परमिशन देनी चाहिए यह एक बड़ा सवाल जिला प्रशासन के लिए खड़ा होता है ?

पुलिस प्रशासन वैसे तो अवैध रेत के ट्रैक्टर पर भी समस्त स्टाफ लेकर के कार्यवाही करने नदियों के घाट पर पहुंच जाता है मगर धड़ल्ले से चल रहे इस रेत के गोरखधंधे पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ती मशीनों द्वारा नदियों का सीना छलनी कर रेत निकाली जा रही है और प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है शायद प्रशासन यह भूल गया है कि जब प्रकृति इंसानों के साथ खिलवाड़ करती है तब शासन और प्रशासन अपने अपने चेंबर में बंद हो जाते हैं ताजा मामला कोरोनावायरस के माध्यम से दिखाई देता है कि जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जाता है तब प्रकृति भी इंसानों को इंसानों से मिलने का हक छीन लेती है इस बात को शासन और प्रशासन के नुमाइंदे केवल गरीब जनता और मजदूरों पर ही प्रभावित होना क्यों समझते हैं जैसे ही प्रकृति ने अपने आपको कंट्रोल कर कुछ छूट दी है वैसे ही प्रशासन फिर से प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने में अमादा हो गया है अभी तक रेत के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाते थे कि रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन नहीं किया जाएगा मगर कुछ रसूखदार लोगों व नेताओं की जुगलबंदी के कारण यह प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारी नतमस्तक दिखाई देते हैं अभी कोरोना वायरस फैलने से पहले कांग्रेस की सरकार मध्यप्रदेश में थी तब कांग्रेस के नेता विधायक और नेताओं के चमचे इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त नजर आते थे जिन पर भा जा पा के नेता दोनों हाथों से कीचड़ उछालते दिखाई देते थे आज मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार होने पर वही कीचड़ से सने हाथ रेत से धोए जा रहे हैं और प्रशासन की जेब में पोछे जा रहे हैं जिले में बैठे पुलिस और राजस्व के बड़े अधिकारी क्या इस बात से अनभिज्ञ है या इस बात को नजरअंदाज कर रहे हैं यह छुट-भैया नेता और इन नेताओं के चमचे आज सरेआम प्रशासनिक अधिकारियों के सामने पत्रकारों व समाज सेवकों को खुलेआम धमकी देते हैं और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश भी करते हैं और प्रशासन एक कठपुतली की तरह नजर आता है क्या प्रशासन का हर एक अधिकारी केवल माफियाओं से पैसे कमाने के लिए ही अपनी पोस्टिंग रेत से संबंधित थाना क्षेत्रों में कराता है यह एक बड़ा सवाल जनता की ओर से नजर आता है?

 अगर खबरों के माध्यम से किसी पत्रकार द्वारा इन रेत माफियाओं व अधिकारियों की पोल खोली जाती है तो यही अधिकारी उन पत्रकारों पर भी दबाव बनाने का भरसक प्रयास करते हैं वही खनिज विभाग से संबंधित अधिकारी तो ऐसे बैठे हैं जैसे सर्कस में पिंजरे के अंदर शेर को बैठा दिया जाता है जो शक्ल से तो शेर नजर आता है मगर वास्तव में उसकी गतिविधि किसी चूहे से अधिक नहीं होती ।
अब देखना यह है की क्या प्रशासन इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करता है या इन्हें इस सरकारी काम की आड़ में डंप करने की परमिशन देता है।
 *मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ चंदला*

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