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एक पंडित जी कई वर्षो से काशी में शास्त्रों और वेदों का अध्ययन कर रहे थे। उन्हें सभी वेदों का ज्ञान हो गया था

एक पंडित जी कई वर्षो से काशी में शास्त्रों और वेदों का अध्ययन कर रहे थे। उन्हें सभी वेदों का ज्ञान हो गया था। ‼️*

पंडित जी को लगा कि अब वह अपने गाँव के सबसे ज्ञानी व्यक्ति कहलायेगे। उनके अन्दर घमण्ड आ गया था।

अगले दिन पंडित जी अपने गाँव जाने लगे। गाँव में आते ही एक किसान ने उनसे पूछा, क्या आप हमें बता सकते है, कि हमारे समाज में लोग दुखी क्यों है? पंडित जी ने कहा, लोगो के पास जीने के लिए पर्याप्त साधन नहीं है। अपनी जरुरत पूरी करने के लिए धन नहीं है, इसलिए लोग दुखी है। किसान ने कहा, परन्तु पंडित जी जिन लोगो के पास धन दौलत  है, वह लोग भी दुखी है। मेरे पास धन सम्पती है फिर भी मै दुखी हूँ क्यों ?

पंडित जी को कुछ समझ नहीं आया कि वह किसान को क्या उत्तर दे।

 किसान ने कहा कि, वह आपको अपनी सारी संपत्ति दान कर देगा अगर आप उस के दुःख का कारण पता करके उसे बता दे तो। पंडित जी ने उसकी संपत्ति के लालच में कहा,ठीक है मैं कुछ दिनों में ही आपके दुःख का कारण ढूंढ लाऊंगा।

 यह कहकर पंडित जी पुनः काशी चले गए। उन्होंने शास्त्रों और वेदों का फिर से अध्ययन किया, परन्तु उन्हें किसान के सवाल का जवाव नहीं मिला। पंडित जी बहुत परेशान थे। वह सोच रहे थे कि अगर मैं किसान के सवाल का उत्तर नहीं दे पाया तो, लाखो की संपत्ति हाथ से चली जाएगी।

अचानक उनकी मुलाकात एक औरत से हुई, जो रोड पर भीख माँग कर अपना गुजारा करती थी। उसने पंडित जी से उनके दुःख का कारण पूछा।

 पंडित जी ने उसे सबकुछ बता दिया। उस औरत ने कहा कि, वह उनको उनके सवाल का उत्तर देगी, परन्तु उसके लिए उन्हें उसके साथ कुछ दिन रहना पड़ेगा। पंडित जी कुछ देर चुप रहे वह सोच रहे थे कि, वह एक ब्राह्मण है, इसके साथ कैसे रह सकते है। अगर वह इसके साथ रहे तो उनको धर्म नष्ट हो जायेगा। पंडित जी ने फिर सोचा कुछ दिनों की बात है, उन्हें किसान के सवाल का उत्तर जब मिल जायेगा वह चले जायेगे, और किसान की संपत्ति के मालिक बन जायेगे।

पंडित जी उसके साथ रहने के लिए तैयार हो गए। कुछ दिन तक वह उसके साथ रहे पर सवाल का उत्तर उस औरत ने नहीं दिया। पंडित जी ने उससे कहा, मेरे सवाल का उत्तर कब मिलेगा। औरत बोली, आपको मेरे हाथ का खाना खाना होगा। पंडित जी मान गए। जो किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे, वह उस गन्दी औरत के हाथ का बना खाना खा रहे थे। उनके सवाल का उत्तर अब भी नहीं मिला। अब औरत ने बोला उन्हें भी उनके साथ सड़क पर खड़े होकर भीख मांगनी पड़ेगी। पंडित जी को किसान के सवाल का उत्तर पता करना था, इसलिए वह उसके साथ भीख मांगने के लिए भी तैयार हो गए। उसके साथ भीख मांगने पर भी उसे अभी तक सवाल का उत्तर नहीं मिला था।

एक दिन औरत ने पंडित जी से कहा कि उन्हें आज उसका झूठा भोजन खाना है। यह सुनकर पंडित जी को गुस्सा आया, और वह उसपे चिल्लाये और बोले तुम मुझे मेरे सवाल का उत्तर दे सकती हो तो बताओ।

वह औरत मुस्कुराई और बोली, पंडित जी यह तो आपके सवाल का उत्तर है। यहाँ आने से पहले आप किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते थे। मेरे जैसी
औरतो को तो आप देखना भी पसंद नहीं करते थे, परन्तु किसान की संपत्ति के लालच में आप मेरे साथ रहने के लिए भी तैयार हो गए।

पंडित जी इंसान का लालच और उसकी बढ़ती हुई इच्छाए ही उसके दुःख का कारण है। जो उसे वह सबकुछ करने पर मजबूर कर देती है, जो उसने कभी करने के लिए सोचा भी नहीं होता।

तो दोस्तों, हमे इतनी भी लालच नही
करना चाहिये की हम हमारा आत्म सम्मान खो बैठे । धन , सुख ,संपत्ति आनी जानी हैं पर आपका सम्मान आपके जाने के बाद भी तटस्थ रहेगा।
धन की लालच ना करे ।

वैसे तो जीवन मै हमारे पास अनेको
कारण दुःख के होते हैं । हमे ये नही मिल पाया ,हमारे बच्चों को ये नही मिल पाया, हमे बढ़ा घर का सुख नही मिला, हमे बढ़ी गाडी का सुख नही मिला । हमारी लालच हमेशा बढ़ती ही जाती हैं ।

 हमें जो मिलता हैं हम उसमे ख़ुशी की तलाश नही करते पर जो नही मिल पाता उसका हम जिंदगी भर गम पालते हैं । हमारी हालत वैसे ही हैं यदि एक दांत टूट जाए तो हमारी जुबान उसी खाली दांत की तरफ ही जायगी । हम जो 31 दांत बचे उसका
आनन्द नही उठाते ।

जिंदगी मै लालच हमे अन्धकार की
और ले जाता हैं । यही हमारे घमण्ड का कारक भी बनता हैं । लालच हमे
ऊंचाई से नीचे भी गिरा देता हैं ।
 किसी वस्तु को पाने की मेहनत करना सफलता हो सकती हैं।पर किसी वस्तु की लालच कर उसको गलत तरीके से पाना हमे अपने आपको भटका सकता हैं । ज्यादा लालच हमारे दुःख का कारण भी बनता हैं । हम कल के लिये और और इकट्ठा करने के लालच मै आज की
*जिंदगी भी नही जी पाते ।*

🌹✍️ प्रदीप गुप्ता एडवोकेट/ मंडल ब्यूरो चीफ अयोध्या
📞 9616153273 ,9453054050

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