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बैंकों के मनमानी फसल बीमा करने पर रोक

*रिपोर्ट - संदीप गुप्ता ब्यूरो चीफ/मीडिया प्रभारी सदर अयोध्या।* 


*बैंकों के मनमानी फसल बीमा करने पर रोक*।

 *फसली ऋण देने वाले बैंक अब लेंगे सहमति*।

 *अयोध्या* । केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। फसली कर्ज लेने वाले किसानों की फसल का संबंधित बैंक बिना सहमति के बीमित नहीं कर सकेंगे। बीमित करने के लिए किसानों की सहमति लेनी होगी। मुख्य विकास अधिकारी प्रथमेश कुमार ने आदेश जारी कर दिया है। अभी तक बैंक हो या सहकारी समितियां जब किसान फसली ऋण लेते थे तो प्राकृतिक आपदा में फसल की नुकसानी से कर्ज को सुरक्षित रखने के लिए फसल का बीमा कर देते थे। राज्य सरकार के नए आदेश ऐसा नहीं कर सकेंगे।केंद्र सरकार के इस निर्णय से किसानों को बड़ी राहत मिली है। पहले बैंक फसली ऋण देने के साथ स्वयं फसल का बीमा कर किस्त संबंधित इंश्योरेंस कंपनी को भेज देते रहे।लेकिन किसानों को फसल का नुकसान होने पर वह मुआवजा नहीं मिल पाता था जितना मिलना चाहिए।
बीते रबी सीजन में जिले के करीब 35 हजार किसानों ने फसल का बीमा कराया। बीमा किस्त में लगभग एक करोड़ से ऊपर की धनराशि बीमा करने वाली कंपनी को मिली।अभी तक एक किसी भी किसान को फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला। बेमौसम बारिश से किसानों की फसल चौपट हो गई। गेहूं उत्पादन घट गया।बीमा कंपनी के जिला समन्वयक में राजकुमार पांडेय का कहना है कि 165 किसानों की रिपोर्ट मुआवजा देने के लिए प्रदेश मुख्यालय भेजी है।धनराशि उनके बैंक खाते में जाएगी।अन्य किसानों का सर्वे किया जा रहा है। वहीं किसानों का कहना है जब खेत में गेहूं की फसल खड़ी नहीं है तो बीमा कंपनी के सर्वे काम मतलब समझ से परे है। सिर्फ किसानों को तसल्ली के लिए सर्वे करने में लगे हैं। 
फसल बीमा को लेकर किसान बराबर शिकायतें करते रहे। बढ़ते दबाव के बाद सरकार को फसल बीमा किसानों के लिए स्वैच्छिक करना पड़ा। इसे किसानों की बड़ी जीत बताया जाता है।

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