Header Ads

.

आगरा धनौली में बनाये जाने को प्रस्‍तावि‍त सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का रुका हुआ काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। जो कि‍ हकीकत में कोई नया कार्य

आगरा धनौली में बनाये जाने को प्रस्‍तावि‍त सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का रुका हुआ काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। जो कि‍ हकीकत में कोई नया कार्य न होकर प्रदेश के सबसे पुराने सि‍वि‍ल एयर एन्‍कलेव को शि‍फट कर नये स्‍थान पर लेजाये जाने भर का काम है अब तक रुके रहने का कारण अब तक एयर पौल्‍यूशन को मुख्‍य मुददा बनाकर सि‍वि‍ल एन्‍कलेव की शि‍फ्टि‍ग के काम को रोका हुआ था। वि‍संगति‍ यह थी कि‍ मानव स्वस्थ के लि‍ये घातक स्‍थि‍ति‍ तक पहुंच चुके राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दि‍ल्‍ली एन सी आर में जहां चौथा एयरपोर्ट सफदरजंग एयरपोर्ट पूर्व नाम वि‍लि‍गटन एयरुील्‍ड-नई दि‍ल्‍ली, पालम एयरपोर्ट, इन्‍दि‍रा गांधी एयरपोर्ट टर्मि‍नल -3, हि‍डन एयरपोर्ट नागरि‍क उडान भाग आप्रेटि‍ड थे वहीं जैबर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाये जाने की योजना पर जोरशोर से काम शुरू हो गया वहीं एक इंमारत के स्‍वरुप को संरक्षि‍त करने के नाम पर सि‍वि‍ल एन्‍कलेव बनाये जाने के काम में भी अब तक रोडे लटकाये जा रहे हैं राजनीति‍ज्ञ दायि‍त्‍व को समझें काम अटकाने के काम में सबसे ज्‍यादा बाधक पर्या वरण को दृष्‍टि‍गत उद्योगों एवं अवस्‍थापना संबधी कार्यों की वह सूची रही है जि‍समें कि‍ उद्योगों के साथ ही अवस्‍थापना संबधी कार्यों को भी डाल दि‍या गया था। देश के सबसे सैंस्‍टि‍व वैस्‍ट बैंक इको एरि‍या और मीजोराम जैसे वि‍शि‍ष्‍ट पर्यावरण के लि‍ये पहचान वाले क्षेत्रों तक को अनदेखा कर दि‍या गया किन्तु ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन में जो हो सकता था उसे भी 2014 से रोक दि‍या गया। इस रोकटोक का कारण हालांकि‍ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का ही सबसे ज्‍यादा हवाला दि‍या गया जबकि‍ इसके कारणों में मुख्य उ प्र सरकार की कोर्ट में लचर पैरवी, आगरा के हि‍तों को अधि‍कारि‍यों से लेकर राजनेता तक नजर अंदाज करना अन्य कारण रहे वि‍धायि‍का में बोलने की स्‍वतंत्रता के व्यापक अधि‍कारों तक का आगरा के जन प्रति‍नि‍धि‍यों के द्वारा पि‍छले छ सालों में शायद ही कभी उपयोग कि‍या गया हो परि‍णाम सामने है कि‍ जहां जैबर के एयरपोर्ट प्रोजेक्‍ट के लि‍ये स्विट्ज़रलैंड की कंपनी नि‍वेश करने आ गयी है वहीं आगरा में एक एक फ्लाइट को लेकर केवल बयानबाजी ही की जाती रही है अब कोई कानून अडचन नहीं पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय Ministry of Environment, Forest and Climate Change के द्वारा पर्यावरण स्वीकृति ‍ के लि‍ये उद्योगों का वर्गीकरण कर दि‍या गया था रेड ,ऑरेंज, व्‍हाइट और ग्रीन जोन चार वर्गों में इन्हें वि‍भक्‍त कि‍या गया संयोग से या अल्‍प जनकारि‍यों व सूचनाओं के अधार पर ढाचागत सुवि‍धाओं के अनुरक्षण व विस्तार को उद्योगों के समान ही सूची में शामि‍ल कि‍या गया लचर पैरबी का असर यह हुआ कि‍ भरपूर धूल उडाने और पांच साल से ज्‍यादा तक महानगर के जनजीवन को अस्तव्यस्त कि‍ये रहने वाले बहुचरणीय मैट्रो रेल प्रोजेक्‍ट को तो ढाचागत सुवि‍धा मानकर सूची में नहीं रखा गया और काम शुरू करने की तो अनुमति‍ मि‍ल गयी वहीं दूसरी ओर सि‍वि‍ल एन्क्लेव आगरा के प्रोजेक्‍ट का काम शुरू करवाना तो दूर इसे वाइंडअप करने जैसे हालात तक बनाने में कोई कसर नहीं छोडी गयी अब नीति‍गत तौर पर बडा बदलाव आता प्रतीत हो रहा है जि‍सके तहत एयरपोर्ट और एयरस्‍ट्रि‍प्‍स अब ढांचागत सुवि‍धाओं में मानी जायेंगी इस प्रकार पॉल्‍यूटि‍ड इंडस्‍ट्रि‍यों और प्रोजेक्‍ट की सूची में लाल/औरेंज सूची में शामि‍ल नहीं रह गये हैं। तकनीकि‍ भाषा और अंतनिहि‍त अर्थ हो सकता है कुछ और भी हो कि‍न्‍तु प्रकट तौर पर तो यही है टी टी जैड की मीटि‍ग हो इस सम्बन्ध में लघु उद्योग भारती के संगठन मंत्री राकेश गर्ग का वक्तया कम से कम आगरा के लोगों के लि‍ये तो महत्‍वपूर्ण है ही जो उन्होंने वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मुलाकात कर इसी महीने मई में ही दि‍या था यह बात अलग है कि‍ श्री गर्ग व उनके साथ केन्‍द्रीय मंत्री से मि‍ले अन्य महानु भावों ने मुलाकात के बाद आगरा से संबधि‍त तमाम उद्योगों के वर्ग बदलने तथा सकारात्मक स्‍थति‍यां बन जाने की जानकारि‍यां दी किन्तु आगरा की सबसे बडी जरूरत सि‍वि‍ल एन्‍कलेव की धनौली में शि‍फटि‍ग को लेकर जनअपेक्षा के अनुरूप कुछ ठोस जानकारी नहीं दी सि‍वि‍ल सोसायटी ऑफ़ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा के – ताज ट्रि‍पेजि‍यम जोन अथार्टी के चेयरमैन और सभी गेर सरकारी व नामि‍त सदस्‍यों से अनुरोध है कि‍ श्री गर्ग की मुलाकात के परि‍प्रेक्ष्‍य में तज ट्रि‍पेजि‍यम जोन की मीटि‍ग आहूत कर सि‍वि‍ल एन्‍कलेव का काम शुरू करवाये जो कि‍ पहले से ही सुप्र्रीम कोर्ट के द्वारा कुछ दि‍शा र्नि‍देशों के साथ स्वीकृति है
*रिपोर्ट | भोवन सिंह रिपोर्टर आगरा*
( *NEWS 24 INDIA न्यूज चैनल*)

No comments