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पत्रकार को फोन पर जान से मारने कि धमकी देने वाले रेत माफिया के खिलाफ जिले के आला अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन

बड़ी खबर......
पत्रकार को फोन पर जान से मारने कि धमकी देने वाले रेत माफिया के खिलाफ जिले के आला अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन*

*चंदला* - चंदला में रेत माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों पर अब जान जाने का संकट मंडराता दिखाई देने लगा है। क्योंकि रेत माफिया अब सीधे ट्रक चढ़ाने कि धमकी देने लगे है। और जान ना ले पाएं तो झूठे किसी संगीन मामले में फंसा कर उनका करियर खत्म करने की होड़ में लगे है।

ऐसा तभी होता है जब अधिकारी ऐसे रेत माफियाओं की पीछे की जेब में डले होते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो अभी तक किसी ट्रक या धमकाने वाले रेत माफिया पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई।

इसी बात से आहत होकर आज पत्रकार को अपनी अस्मिता बचाने के लिए छतरपुर जिले के आला अधिकारियों को आवेदन देना पड़ा ताकि जल्द कार्यवाही हो सके।

आवेदक महेंद्र ठाकुर पत्रकार ने डीआईजी छतरपुर व एसपी छतरपुर को शिकायती आवेदन दिया है जिसके साथ रेत माफिया रूद्र प्रताप पटेल द्वारा उन पर दी गई धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग को सीडी के माध्यम से संलग्न भी किया है जिसमें रेत माफिया रूद्र प्रताप पटेल ने आवेदक पत्रकार महेंद्र सिंह ठाकुर को जान से मारने की धमकी वाह झूठे संगीन केस में फंसाने की धमकी साफ तौर पर दी है।

आवेदक पत्रकार समाज का आईना है जिसे रेत माफियाओं द्वारा तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि रूद्र प्रताप पटेल पहले से अपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है जिसकी पुरानी जीवन गाथा कई बार समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित की गई है अतः आवेदक पत्रकार ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के रेत माफियाओं से भयभीत है और उसे अपने कार्य को करने पर जान का खतरा नजर आता है जिस कारण से पत्रकार द्वारा अपने और अपने परिवार की किसी भी प्रकार से क्षति पहुंचने पर केवल और केवल रूद्र प्रताप पर ही संदेह है।

आवेदन डीआईजी छतरपुर व एसपी छतरपुर द्वारा स्वीकारा गया है और पत्रकार को आश्वस्त किया गया है की ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति रखने वाले रेत माफियाओं वाह अपराधियों पर सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी और पत्रकारों पर होने वाले इन दुष्प्रभावों को रोका जाएगा।

अब देखना यह है की आला अधिकारियों द्वारा दिया गया आश्वासन केवल आश्वासन रहता है या उस पर कोई सच्चाई भी नजर आती है क्योंकि रूद्र पटेल जैसे रेत माफिया राजनैतिक संरक्षण पाकर लोकल अधिकारियों को अपने पेंट की पीछे की जेब में रखते हैं ऐसा इंदैद माफियाओं के गुर्गों द्वारा समाज में कहा जाता है अब देखना दिलचस्प होगा की वाकई इन लोगों की बातों में सच्चाई है अथवा यह केवल गाल बजाते रहते हैं।

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