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पुलिस और पत्रकार समाज रूपी रथ के दो पहिए*देश ब्यापी लॉकडाउन के दौरान जनहित मे निरंतर तन्मयता निस्वार्थ भाव पूरी पारदर्शिता से सदैव असहाय कमजोर को न्याय दिलाने सामाजिक

*पुलिस और पत्रकार समाज रूपी रथ के दो पहिए*

देश ब्यापी लॉकडाउन के दौरान जनहित मे निरंतर तन्मयता निस्वार्थ भाव पूरी पारदर्शिता से सदैव असहाय कमजोर को न्याय दिलाने सामाजिक समरसता को अपनी लेखनी के द्वारा प्रकट करने वाले एवं अराजक तत्वों के कारनामों को लेखनी के द्वारा धूल चटाने व प्रशासन को समय समय पर न्याय के लिए न्याय हित में प्रेरित करने हेतु इस कड़ाके की दुपहरी में सारा दिन जगह-जगह जाकर कवरेज करना व समाज के प्रति पत्रकारिता को अपने अहम कर्तव्य का पारदर्शिता से सहयोग करते रहने के लिए जुझारू निर्भीक पुलिस और पत्रकार समाज रूपी रथ के दो पहिए हैं जिन पर समाज के उत्थान एवं समाज में शांति व्यवस्था कायम करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है जहां पुलिस विभाग अपराधों पर अंकुश लगाकर समाज में शांति व्यवस्था कायम करता है वहीं यह चौथा स्तंभ प्रशासन को समाज में हो रही कुरीतियों और असामाजिक घटनाओं को उजागर कर प्रशासन को न्याय हित में कार्य करने के लिए सदैव प्रेरित करता है बगैर दोनों के तालमेल व सहयोग के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं होता निस्वार्थ भाव से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे। परंतु इस दौर में अब चौथे स्तंभ का अस्तित्व बच पाना मुश्किल है। ना तो शासन द्वारा चौथे स्तंभ का ख्याल रखा जा रहा है और ना ही प्रशासन द्वारा। बस अब मात्र कहने के लिए चौथा स्तंभ बचा हुआ है और............?

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