Header Ads

.

योग,प्राणायाम तथा प्राकृतिक चिकित्सा समय की मांग-डॉ0 रमेश चन्द्रा

योग,प्राणायाम तथा प्राकृतिक चिकित्सा समय की मांग-डॉ0 रमेश चन्द्रा
--------------------------------------------------
योगा चार्य एवं एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ0 रमेश चंद्रा ने वैश्विक बीमारी कोरोना के संबंध में अपने विचारों से जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से जनमानस को अवगत कराते हुए सुझाव ,कारण व निवारण बताए।पंच तत्वों का असंतुलन ही रोग का कारण
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति के सिद्धांतों पर आधारित है हमारा शरीर एव यह ब्रह्मांड पंचमहाभूतो (आकाश, वायु, अग्नि ,जल और पृथ्वी)से बना है, और इन तत्वों में असंतुलन ही रोग को जन्म देता है। महर्षि चरक के अनुसार ( स्व+स्तिथ = स्वस्थ )जो व्यक्ति स्वयं में स्थित है वही व्यक्ति स्वस्थ है स्वयं में स्थित होने के लिए उन्होंने कहा
सम दोस: समागिनश्चय, सम धातु मल क्रिय:।  प्रसन्नआत्मइंद्रिय मन:  
स्वस्थ इत्याभिधियेते।
जिसके सारे दोष ,(वात, पित्त एवं कफ) सारी अग्निया ,(पंचतत्व+सात धातुएं एवं एक जठराग्नि= १३ अग्निया )सारी धातुएं (रस ,रक्त ,मांस ,मेद , अस्थि ,मज्जा एवं शुक्र) और जिसकी मल मूत्र की क्रिया सम हो , एवं जिसकी मन आत्मा और इंद्रियां प्रसन्न हो वह आदमी स्वस्थ कहलाता है। और यह तभी संतुलित हो सकता है जब हम अपना खानपान, नियमित दिनचर्या और नियमित योग प्राणायाम करें। योग के तीन स्तंभ होते हैं आहार, निद्रा एवं संयम (ब्रह्मचर्य) । इन तीन स्तंभों का मजबूत होना जरूरी है।
प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सब रोग एक होते हैं और सब का कारण भी एक होता है और सब का उपचार भी एक होता है । जब शरीर में टॉक्सिंस नहीं निकल पाते और वह एक जगह इकट्ठा होने लगते हैं तो रोग हो जाता है प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार कब्ज ही रोगों की मुख्य जननी होती है यदि पेट में कोई विकार नहीं है तो मनुष्य स्वस्थ रहता है प्रकृति के नियमों की अवहेलना करने पर बीमारियां होती हैं । प्रकृति हमारी मां है हम जितना प्रकृति के करीब रहते हैं उतना ही स्वस्थ रहते हैं और जितना दूर जाते हैं उतना ही बीमार।कहीं  यदि शरीर से टॉक्सिन को प्राकृतिक ढंग से निकलने दिया जाए और अपने खानपान पर नियंत्रण किया जाए तो हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और हम स्वस्थ हो जाते हैं किसी वायरस या बैक्टीरिया का प्रभाव शरीर पर नहीं हो पाता इस समय हमारे समाज व पूरे विश्व में फैली हुई वैश्विक महामारी कोरोना या कोविड-19 संक्रमण होने का मुख्य कारण भी हमारी प्रतिरोधक क्षमता में कमी है । कहीं ना कहीं हमने प्रकृति के साथ बहुत खिलवाड़ किया है। इस रोग का कारण भी हमारी ही देन है।
पंच तत्वों को संतुलित रहने के लिए सूर्य किरण का नियमित सेवन,जल उचित मात्रा में लेना ,उपवास करना,आहार-विहार ,दिनचर्या और नियमित योग प्राणायाम करके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है ।शरीर के टॉक्सिंस को प्राकृतिक ढंग से निकलने देना चाहिए ।इसके लिए नियमित योग प्राणायाम करें गुनगुना पानी पिए ,ताजे रसीले फल, विटामिन सी, संतरा ,मौसमी, मौसम के अनुसार फल एवं सब्जी का प्रयोग करना चाहिए ज्यादा ठंडे जल का प्रयोग ना करें और ऐ /सी का परित्याग करें।
कम उम्र के लोगों को यह रोग उनके गलत खानपान ,अनियमित दिनचर्या, शारीरिक श्रम न करना, आहार-विहार का असंतुलन, नकारात्मक विचार ,प्रदूषित वातावरण और प्रतिरोधक क्षमता की कमी होने के कारण हो रहा है।
रिपोर्टर-फ़िरोज़ आलम खान प्रयागराज उ0प्र0

No comments